Translate

Thursday, May 28, 2020

The truth of Prime Minister's unemployed allowance scheme 2020

Pradhanmantri_Berojgari_Bhatta_Yojna_2020_Fake_news
Know the truth about Pradhanmantri_Berojgari_Bhatta_Yojna_2020_Fake_news

Highlights;

  • What is the truth of PM Berojgari Bhatta Scheme?
  • Prime Minister unemployed allowance scheme only a rumor, online application form, do not register. PM Berojgar Bhatta 2020 Scheme is Fake.

We all know how much unemployment is there in our country. Even today, if a single place is vacant for peon to higher posts, then people who have done PhD on it also do not hesitate to apply. In such a situation, many such rumors from job to unemployment allowance are spread on which people easily believe. One such scam has hit our hands, so thought that you should be careful about it. Nowadays, a lot of rumors are flying through social media about Prime Minister Unemployment Allowance or a scheme named Pradhan Mantri Berojgari Bhatta (PM Unemployment Allowance). Through this message being spread on social media, people are being misled that unemployment allowance will be received from the central government, but the truth of this message or message is something else.

 

If you too are hearing about such a scheme and are about to apply, then read this article before us so that your eyes are slightly opened. In this article we will also tell you how you can find out if the plan is right or not. Stay with us till the end to know the truth of the Prime Minister's Unemployment Allowance Scheme.


  •  Prime Minister Unemployment Allowance | What is the truth of PM Berojgari Bhatta Scheme?

Truth Behind Pradhan Mantri Unemployment Allowance Scheme Explained Here;

A message will be sent to you through Prime Minister's Unemployment Allowance 2020 through your WhatsApp or any other social media. In which it is being claimed that the Prime Minister will give 3500 rupees a month to the unemployed people and you have to apply for this, in this message this application is also being told absolutely free. Also, it would have been given that only 20 crore youth will get the benefit of this scheme, then you should get your registration done as soon as possible. The registration date is often extended and the message is being forwarded to the people. But the truth is that no such scheme has been implemented.

PM_Berojgari_Bhatta_2020_Facts

  • Information Asked:

Now when the plan is not implemented, then what is the truth of the link being provided with the message, or the link given on any other blogger's site (https://pradhanmantri-berozgar-bhattayojna.blogspot.com/  & http://bit.ly/pradhanmantri-berozgaari-bhattaa-yojna) is this also false. 

All these links are fake, after visiting this link you will be asked some important information, including your name, your father's name, Indian citizen or not, your age and as soon as you fill all this information another page will open in front of you. , On which you will have been given till Mubarakabad for registration. Also, on that page you must have given that you can take your unemployment allowance by going to Gram Panchayat. But as soon as you fill this information, then see what can really happen to you.


  • Loss of information:

Now as soon as you have given all your information, it can cause two losses, firstly, all the money lying in your bank accounts can be wiped away because you were lured by Rs 3500. Apart from this, all your information will be sold to a private private company, from which you will keep receiving various types of messages and emails. 


  • Truth of the link being spread:

Now, let's talk about the truth behind this link (http://bit.ly/pradhanmantri-berozgaari-bhattaa-yojna). It is a completely fake link and there is another link hidden inside it which is your private information. Wants to get you selected. The hidden link behind this link is from this site www.earnwithkp.com.

 

  • Now you know how to find out on which site your information is safe and which is not :

Keep in mind that this is not the only link through which a fake scheme called Prime Minister Unemployment Allowance is being promoted. You will see many more links; it is prudent that you do not trust any such links. 

Prime Minister unemployed allowance scheme only a rumor, online application form, do not register. PM Berojgar Bhatta 2020 Scheme is Fake.


  • How to know if the site is fake or not :

Whenever you visit a site, especially to complete the process like registration, first check whether the site is secure or not, for this you will be given a Secure or Not Secure at the address bar of your browser. Apart from this, you can see the http: // before the URL, if this is given before the site, then the information is not safe, if it is given https: // before the link to the site, then the site is secure. The S given on this is the pinnacle of security but here mostly https: // is hidden when you copy link site & paste on your any platform like whatsup,google etc. you can direct found the truth behind the site.

 

Also, keep in mind one thing, most of the scheme's official website ends with extensions like .gov, .nic, .org. Therefore, after checking URL completely, take any action. You put a link in the website and search in Google; if the website is really official then you will see the information related to it on other blogs and news portals.

  • We take care of you:

Through our site, we do not only inform you about the scheme, but you also take care that you do not get misled through any other site.

 

विदेशी डिजिटल कंपनियों में अपना आधिपत्य स्थापित करने से ही भारत आत्मनिर्भर बनेगा।


विदेशी कंपनियों को कानून और टैक्स के दायरे से बाहर रहने की सहूलियत से भारतीय उद्योग दौड़ से बाहर हो रहे है।

भारत में रजिस्टर्ड अखबार को अनेक जटिल नियमो का पालन करना होता है।  दूसरी तरफ डिजिटल कम्पनिया भारत से सालाना 20 लाख करोड़ से  ज्यादा का कारोबार करने के बावजूद यहाँ के कानून और टैक्स के दायरे  से  तक बाहर है।

पांच दशक पहले एक गाना बहुत मशहूर हुआ था।  उसमें राज कपूर का जूता जापनी और टोपी रुसी थी, फिर भी हीरो का दिल हिंदुस्तानी था।  व्यक्त बदल गया और करोड़ों हिन्दुस्तानियों  के दिलों पर डिजिटल ने कब्ज़ा कर लिया और विदेशी डिजिटल कंपनियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को टोपी पहनाना शुरू कर दिया। टोपी पहनाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों ने भारत के संचार तंत्र पर और ई -कॉमर्स कपनियों ने 130 करोड़ लोगों के बाजार पर कब्ज़ा कर लिया। अब  लॉकडाउन के संकट का फायदा उठाकर अमेजन प्राइम और नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफार्म मनोरंजन के 2 बिलियन डॉलर के बाजार पर कब्ज़ा की जुगत भिड़ा रहे हैं। OTT  यानी 'ओवर द टॉप ' की कंपनिया मनोरंजन के कार्यक्रम बनाने और उसके डिजिटल  प्रसारण के धंधे में पिछले कई सालो से लगी हुयी है। पिछले कई महीनो से मॉल और मल्टीप्लेक्स बंद है तो ओटीटी पर फिल्मों की रिलीज शुरू होने लगी है। फिल्मों का सबसे बड़ा वैश्विक बाजार भारत में है। इससे लाखो लोगो को रोजगार के साथ सरकारों को टैक्स की बड़ी आमदनी होती है।  फिल्में समाज को प्रभावित करने के साथ बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने में मददगार होती है।

 

इसी बजह से फिल्म में अश्लीलता, हिंसा, शराब, ड्रग्स , पोर्न आदि को रोकने के लिए सेंसर बोर्ड की सख्त व्यवस्था बनाई गई है। पिछले कुछ महीने से ओटीटी प्लेटफार्म में हसमुख  और पाताललोक जैसे हिंसक और अश्लील कार्यक्रमों को बड़ों के साथ बच्चे भी मजे लेकर देख रहे है। रोटी-कपड़ा और मकान के बजाय भारत में बच्चों के लिये भी मोबाइल जरुरी बना दिया गया है।  मोबाइल के माध्यम से डिजिटल कंपनियों का पूरा कारोबार चल रहा है। लॉकडाउन के संकट में लोगों को रोजगार के बजाय कॉमर्स से शराब की होम डिलीवरी दी जा रही है। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में डिमांड और सप्लाई लोकल है, लेकिन डिजिटल बाजार में विदेशी कंपनियों बोकल है।

 

गांव ,कस्बो और जिलों में पुरानी तरह के हजारों सिनेमा हाल बंद होकर मैरिज हॉल और मार्केटिंग कॉम्पलेक्स में तब्दील हो गए। अब ओटीटी की डिजिटल आंधी में जब मल्टीप्लेक्स भी बंदी  मुहाने पर है, तो उसे कौन रोक सकता है? बोस्टन  कंसल्टेंसी की  रिपोर्ट के अनुसार अगले 3 सालों में अटोटी कंपनियों का भारत में पांच मिलियन डॉलर का बाजार हो जाएगा। टेक्नोलॉजी  और विदेशी पूंजी को बड़ी ताकत से लैस ये कंपनियां बाजार में अपना एकाधिकार स्थापित करने में सफल हो रही है। विदेशी कंपनियों को कानून और टैक्स दायरे से बाहर रहने की सहूलियत  मिलने से भारतीय उद्योग दौड़ से बाहर हो रहे हैं। पिछले तीन महीने में आपदा प्रबंधन कानून (डीएमर) के तहत श्रम , किराया और वेतन भत्ते के नियमों में बदलाव हो गए। ओटीटी कंपनियों  के लिए कुछ महीने पहले एक दिन संस्था ने स्वैच्छिक कोड ऑफ कंडक्ट बनाया , पर अधिकांश कंपनिया किसी भी निगम के दायरे में नहीं आना चाहती है। सरकार यदि ओटीटी कंपनियों  पर सेंसर बोर्ड के नियम और टैक्स व्यवस्था लागू करने में विफल हो रही है तो फिर परंपरागत सिनेमा कारोबारियों को भी सेंसर बोर्ड और टैक्स नियमों की जकड़न से मुक्ति क्यों नहीं  मिलना चाहिए ?

 

लोकतंत्र का चौथा  स्तंभ मीडिया भी लॉकडाउन के कठिन दौर की वजह  से अनेक संकटो का शिकार हो गया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रतिस्पर्धा आयोग ने संकट के मूल कारण को पहले से पहचान लिया था। अखबारों की न्यूज़ से विदेशी डिजिटल कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बड़ी आमदनी होती है। आयोग ने सोशल मीडिया कंपनियों  से कहा है कि न्यूज से हो ही आमदनी को ऑस्ट्रेलियाई अखबारों के साथ शेयर करना होगा। भारत में अनेक भाषाओं में प्रकाशित होने वाले एक लाख से ज्यादा अखबार और पत्रिकाओं  से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। नियमों के अनुसार मीडिया के कारोबार में विदेशी कम्पनिया सीधे तौर  नहीं आ सकती। भारत  में रजिस्टर्ड  अखबार व टीवी मोडिया को जटिल नियमों का पालन करना होता है। दूसरी तरफ डिजिटल कंपनियां भारत से सालाना  20 लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने के बावजूद यहाँ  के कानून व टैक्स  के दायरे से अभी तक बाहर है।

 

आज़ादी के बाद जब संविधान बना, तब न तो मोबाइल था और न ही इंटरनेट।  संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार डिजिटल जैसे  नए मामलों पर केंद्र सरकार को कानून बनाने और कार्यवाही करने का अधिकार मिला है। संघीय व्यवस्था में राज्यों के पास कानून और व्यवस्था का अधिकार होने के बावजूद , उन्हें विदेशी डिजिटल कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही करने का अधिकार की शक्ति नहीं है। डिजिटल इंडिया में आत्मनिर्भर भारत को सफल बनाने में अब संसद , सरकार , अदालत  और कैग को बड़ी भूमिका निभानी होगी।

अब एक साल में ही मिलेगा ग्रेच्युटी का लाभ

Gratuity_Applicable_In_One_Year

 लेबर कोड में सरकार ने किये कई अहम प्रावधान : 

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आत्म निर्भर भारत मिशन के तहत 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की दूसरी किस्त का ऐलान किया है । इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार लेबर कोड के जरिए श्रमिकों के हित में बड़े बदलाव करने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह अभी संसद में लंबित है और वहां से पास होने के बाद श्रमिकों को इसका लाभ मिलेगा। इसमें यह भी प्रवधान किया गया है कि ग्रेच्युटी का लाभ कर्मचारियों को 5 साल की बजाय एक साल की  नौकरी के बाद ही मिलने लगेगा।

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार लेबर कोड के जरिए देशभर में सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिलाएगी। अभी केवल 30% कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन मिल पाता है। सरकार लेबर कोड पर काम कर रही है इसके तहत सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों में न्यूनतम वेतन में अंतर को खत्म किया जाएगा। 

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 10 से अधिक कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों के लिए देश के सभी जिलों में ईएसआईसी सुविधा को लागू किया जाएगा। 10 से कम कर्मचारी वाले संस्थान भी स्वेच्छा से ईएसआईसी से जुड़ सकते हैं। सभी कर्मचारियों का साल में एक बार स्वास्थ्य परीक्षण कराना अनिवार्य होगा।

 

अपॉइंटमेंट लेटर और स्वास्थ्य की जांच

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस बिल के पास होने के बाद सभी कंपनियों के लिए सभी कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सभी कर्मचारियों का साल में एक बार हेल्थ चेकअप कराना होगा।

 

एक साल में ग्रैच्युटी का लाभ

 

वित्त मंत्री ने कहा कि 44 लेबर संबंधी कानूनों को ४ लेबर कोड में समाहित किया गया है। यह संसद तक पहुंच गया है। संसद में पारित होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। इसमें प्रावधान किया गया है कि स्थायी कर्मचारियों को एक साल में ही मिलेगा ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा , अभी 5 साल की सेवा के बाद मिलता है।

 

कैसे मिलता है ग्रेच्युटी का लाभ

 

मौजूदा समय में पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद कंपनी द्वारा कर्मचारी को यह लाभ दिया जाता है। यदि पांच साल से पहले नौकरी बदल ली जाए तो इसका लाभ नहीं मिलता है। ग्रेच्युटी का कर्मचारी बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि इसमें उन्हें एक अच्छी खासी रकम मिलती है। अभी ग्रेच्युटी की गणना के लिए 15 दिनों के अंतिम न्यूनतम वेतन को कामकाज के साल से गुणा किया जाता है और फिर इस रकम को 26 से भाग किया जाता है। न्यूनतम वेतन में महंगाई भत्ते को भी शामिल किया जाता है।

Wednesday, May 27, 2020

Why locusts are attacking India's cities?

LOCUST_ATTACK_IN_INDIA
Locusts attacked in India

In India, a locust team has attacked. The special thing is that this time locusts are not getting a crop to eat, then they are moving towards cities. 

Locusts are so dangerous that if they are not controlled in time, they can cause a grain crisis in a country. When their herd moves, they eat every grain plant that comes in the way. During the last 25 years, these locusts in African countries such as Ethiopia and Somalia have created a grain crisis. And now these locusts have started creating terror in India too.  


April 11, 2020 was the date when a large swarm of locusts were spotted along the Indo-Pakistan border, entering India. After enrolling in India, these grasshoppers are now starting to appear in the cities except in the fields. For the past few days, their herd is being seen in the cities of Rajasthan. Apart from this, they have also been seen in some parts of Madhya Pradesh and some parts of Maharashtra like Vidarbha. But their arrival in India at this time and entering cities is a bit unexpected. The reason for this is that usually a locust team enters India in July-October. Instead of entering India, the border of Pakistan is adjacent to Rajasthan and Gujarat. In the year 2019 also, these locusts ruined the rabi growing crop in western Rajasthan and northern Gujarat. This was the first major locust attack on India after 1997 in 2019. But now for the second year in a row, these locusts have attacked. On April 11, 2020, for the first time, the Ministry of Agriculture had issued a warning regarding the attack of these locusts in Sriganganagar and Jaisalmer districts of Rajasthan. 


KL Gurjar, deputy director of the Local Warning Organization, which comes under the Ministry of Agriculture, says that this team of locusts has attacked ahead of time. Right now there is no crop in the field, so this team of locusts is moving towards the greenery seen in the cities. This is the reason why these locusts are being seen in Jaipur in Rajasthan, Gwalior, Morena and Shivpur in Madhya Pradesh, Amravati, Nagpur and Wardha in Maharashtra. According to KL Gurjar, currently three to four teams of locusts are in Rajasthan, two to three teams are in Madhya Pradesh and a small part of this party has gone to Maharashtra. According to the Locust Warning Organization, due to the high wind speed, these locusts are being penetrated in different states, which can travel about 150 km in a day.  


Keith Kressman, an expert on locusts in the United Nations, believes that these locusts always roam around in search of food. The monsoon has not started yet, so this locust of locusts has come to Rajasthan. And due to drought, they are targeting greenery of cities. It is a matter of why it has come to India about three months ago, so it will have to go in the year 2018, when Mekunu ruined Oman and Luban ruined Yemen badly. 


Due to these two storms, the big deserts of these two countries were transformed into lakes. This led to an increase in the breeding of locusts, which continued continuously till 2019. The number of locusts continued to increase and they continued to attack in East Africa. In November, 2019, the breeding level of locusts became very high. In March-April 2020, there was strong rains in East Africa, so to avoid this group of locusts reached Pakistan via Iran and then entered India from there.  


At present, the risk of loss of crops from the attacks of these locusts in India is extremely low. The reason for this is that there is no crop in the field at the moment. Preparations are now underway to plant paddy seeds, so there is still time for crops to grow. Orange farmers in Maharashtra have expressed some concern, but their attack in Maharashtra is so weak that it can be easily dealt with. KL Gurjar, deputy director of Local Warning Organization himself, has also confirmed this. However, the problem may be greater when breeding of this herd begins. This breeding will start with the onset of monsoon. Generally a female grasshopper is around 3 months of age. The female lays 80 to 90 eggs at a time and in three months she lays eggs three times. This means that a female grasshopper prepares more than 250 new grasshoppers in her three months of life.  


And if the breeding of these locusts is not controlled, then there will be 4 to 8 crore locusts in one square kilometer. And if they start breeding, then it will be difficult to stop them, because by then the kharif crop will be ready in the fields. Efforts have been started by the government to ensure that there is no loss of kharif crop. Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar has held a review meeting for this. After the meeting, it has been claimed that 21,675 hectares of land has been sprayed with pesticides to eliminate locusts. Also, 60 spray machines have been ordered from Britain, which can eliminate these locusts. At the same time, there are already 50 spray machines. KL Gurjar, deputy director of the Local Warning Organization, claims that there is no shortage of locusts, so drones are being resorted to.



Monday, May 25, 2020

IAS Success Story: IIT Bombay again in the first attempt in UPSC, AIR Rank 4, how did Shreyans Kumat achieve this success?

IAS_Success_Story_Shreyans_Kumat
IAS_Success_Story_Shreyans_Kumat

Shreyans Kumat of Rajasthan was promising since childhood but never wanted to go to civil services. After studying at IIT Bombay, what happened to Shreyans, who was working in an MNC and turned to civil services?

Success Story of IAS Shreyans Kumat: In most of the cases, it is believed that candidates make up their mind to go to a service like UPSC much earlier or take it as a career option much earlier. But Shreyans Kumat's case was completely different. He never thought that he would give the IAS exam but when he thought so, he not only thought, but in the first attempt he showed it to be true. While people are not selected even after preparing for years and giving exams several times, Shreyans not only achieved success in the first semester but also brought All India Rank 04 which falls in the category of extreme difficulty. He set this record in his first attempt in the year 2018. Today we know the success story of Shreyans.

 

Poot's feet were seen in the cradle

This tactic fits perfectly on the Shreyans, since Shreyans was an extra brilliant in his childhood. While he was in LKG, his performance was so good that his teacher said that if its UKG scores 100 out of 100, then it will make it a class jump. And it happened that Shreyans brought the whole number and their teacher pushed them one class further. In this way, Shreyans had hinted in childhood that they are quite different from the rest of the children in terms of IQ.

 

Dada's wish was to become an IAS

The house of Shreyans living in Ajmer district of Rajasthan is in Kishangarh. Apart from mother-father and younger sister in his family, he has grandparents. Shreyans' grandfather always wanted him to become an IAS, but in the early days he did not take this thing very seriously, because his tendency was different. His family never put any pressure on Shreyans, they chose the area they wanted to study. As a result, he chose the field of engineering and studied mechanical engineering from IIT Bombay. After this, he worked as a management consultant in a firm for two years.

 

The idea of ​​doing something for the society changed the outlook

After working for some time, Shreyans got the idea that they should do some work, so that they can do something for themselves and family as well as society. After much thinking and introspection, he decided that he would choose the field of civil services. Prior to this, he met many people of this region in his frequent trips, in which mountainering is the most. These people doing government work were people sitting at the small to big level. For example, he talked to an Asha worker and also to an IAS officer. After understanding everything, he finally decided that this area is best for him.

 

Success achieved through self study

After choosing his destination, Shreyans left the job first and started studying day and night only and only. If he did not understand the concept of coaching very much, then he relied on self study and moved forward. They found out the subject of examination, exam pattern etc. and made their strategy plan accordingly. He used to study for 8 to 10 hours every day. He laid great emphasis on regular studies and revision.

 

Along with this, a lot of mock tests were given. Shreyans read the newspaper every day and made preparations for the pre and mains together and as a result in the first attempt in the year 2018 achieved success. The success story of Shreyans suggests that there is no precise time to choose or change a career. If there is true passion and there is a strong desire to reach the destination, then you can go on a journey anytime. Just take the confidence of victory together.

 

IAS Interview Tricky Questions: List of weird and poor questions asked by UPSC in IAS Interview

Here is a list of such bizarre questions and their answers which can be asked by UPSC in IAS interview. Candidates must read it.

 

Tricky Questions for IAS Interview 2020: All applicants applying for the UPSC Civil Services Examination wish that they become IAS by being selected in this exam. But to get selected in this one has to go through many stages. The question that arises in the minds of the candidates who go for the interview for the first time is, what or what type of questions can be asked by UPSC. Keeping these things in mind, those questions are being discussed here, which can be asked in IAS interview. Do read these questions here and take some ideas.

 

1.    Question: What is Password in Hindi?

        Answer: Password is called a code in Hindi.

2.    Question: How to write 23 using only 2.

        Answer: 22 + 2/2 

3.    Question: What will you do if I run away with your sister?

        Answer: I will be very happy, because I can not find a better match for my sister than you.

4.    Question: The interviewer ordered a cup of coffee for the candidate. Coffee was placed in front of the candidate. Then the candidate was asked what is before you?

         Answer: T comes before U. The alphabet 'T' comes before 'U' and hence T comes before U 

5.    Question: What can you never eat for breakfast?

        Answer: Dinner. 

6.    Question: What if you wake up one morning and you find that you are pregnant. (From female candidate) 

         Answer: I will be very happy and share this information to my husband. Or I will tell my husband the good news as I am happy. And I will celebrate happiness with my husband. 

7.    Question: What is the form of a woman that everyone can see, but her husband can never see?

        Answer: Form of widow 

8.    Question: Who is she who comes once in a month and goes away after spending 24 hours with you?

        Answer: Date, it comes only once a month and the next date after 24 hours.

9.    Question: Can you speak the names of three consecutive days in which Wednesday, Friday and Saturday do not come?

        Answer: Yesterday, Today and Tomorrow 

10.    Question: Peacock is a bird that does not lay eggs, so how its children are born. 

         Answer: The female peacock gives eggs not peacock.


Sunday, May 24, 2020

निजी सचिव उप महानिरीक्षक सुरक्षा रेलवे एवं एन.एस.जी. कमांडो सक्सेस स्टोरी - श्री नवनीत जी व् श्रीमती विमला चक्रवती जी जबलपुर(म.प्र.)

संस्कारधानी जबलपुर के गौरव,एन.एस.जी. कमांडो सक्सेस स्टोरी- श्री नवनीत जी , श्रीमती विमला चक्रवती जबलपुर(म.प्र.) ,रनर क्लब जबलपुर
संस्कारधानी जबलपुर के गौरव रनर्स क्लब जबलपुर संस्थापक -श्री नवनीत जी 


मुख्य अंश :

  • जानें संस्कारधानी जबलपुर के गौरव श्री नवनीत ने कैसे शासकीय कार्य में होते हुए अपना जीवन प्रतिभाशाली बच्चों के जीवन को निखारने में लगा दिया।
  • जानें प्रतिभागी परीक्षाओ में प्रतियोगियों को कैसे शारीरिक दक्षता में निपूर्ण करते है श्री नवनीत।
  • आर्थिक रूप से कमजोर मगर प्रतिभाशाली व्यक्तियों का सम्पूर्ण खर्च वहन कर उन्हें शासकीय नौकरी के लिए चयनित करवाना।
  • जानें कैसे  श्रीमती विमला चक्रवती पत्नी श्री नवनीत ने  एन.एस.जी. कमांडो के रूप में संस्कारधानी जबलपुर (म.प्र.)  को गौरान्वित किया।


जानें संस्कारधानी जबलपुर के गौरव रनर्स क्लब जबलपुर के संस्थापक तथा  निजी सचिव उप महानिरीक्षक सुरक्षा रेलवे जबलपुर (म.प्र.) श्री नवनीत जी एन्ड फॅमिली के बारें में।


कहते है की दुनिया में ऐसा क्या है जो आदमी नहीं कर सकता , जरुरी है लगन , मेहनत और आत्म विश्वास की।

बस एक ऐसी ही छोटी सी स्टोरी आज मैं आपके सामने लेकर आया हूँ उस व्यक्ति और ऐसी फैमली  के बारे में जो निरंतर पिछले 13 वर्षो से लोगो लगातार लोगो की सेवा में निरंतर लगा हुआ है , जिसका मात्रा एक लक्ष्य है प्रतिभाशाली बच्चो की प्रतिभा को निखारना और उसे उसके मुकाम तक पहुंचना। 

जी हाँ ऐसे ही सख्श  का नाम है श्री नवनीत जिन्होंने अपनी संघर्षभरी जिंदगी में सबकुछ देखा और जब वर्ष 2001 में आप पश्चिम मध्य रेलवे  जबलपुर के सुरक्षा विभाग में शामिल हुये तब आपने करियर को यही खत्म नहीं माना। आप वर्ष 2001 से 2004 तक अखिल भारतीय रेलवे / रेलवे की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओ में पश्चिम मध्य रेल का प्रतिनिधित्व किया। आपकी खेल के प्रति समर्पण भावना और खेल क्षेत्र में प्राप्त शिक्षा को देखते हुए रेलवे बोर्ड द्वारा स्वंय संज्ञान लेते हुए एक वर्षीय डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग, एन आई एस  (एथलेटिक्स) पंजाब, पटियाला के लिए आपका नाम नामित किया जिसे आपने वर्ष 2006-2007 में सफलतापूर्वक प्रथम श्रेणी में भी उत्तीर्ण किया।

सच्चा आदमी वही है जो कभी रुकता नहीं सदैव अपने पथ पर चलता जाता है चलता जाता है और बस चलता ही जाता है क्योकि 'रुकने का नाम जिंदगी नहीं' है। ऐसी बात नहीं है की आदमी कभी थकता नहीं , आदमी ही थकता है , हारता है , टूटता है , पारिवारिक परेशानिया भी आती है परतुं सब लेकर चलता है। पर कभी रुकता नहीं है क्योकि "जिंदगी का नाम रुकना नहीं " कहते है न "जिंदगी रुक जाना नहीं" और "चलती का नाम गाड़ी"  , जिंदगी संघर्षमय है और जो इसे समय रहते समझ गया वही आज सफल इंसान है।


बस ऐसे ही सख्शियत का नाम है श्री नवनीत जिनमे हुनर है, जोश है, एथलेटिक्स है  और अपने जीवन के अनुभव से बच्चो का भविष्य बनाना जानते है बस यही कहते है हारना नहीं आज नहीं तो कल एथलेटिक्स परीक्षा में सफल होंगे जरूर बस हौसला रखना है। कामयाबी आपके कदम चूमेगी शायद यही वो जोश है जिससे आज तक आप 700+ बच्चों को उनके करियर पर पंहुचा चुके हो (विभिन्न शासकीय विभागों  में )। एक एवरेज माने तो करीब 50-60 बच्चे हर वर्ष आपके क्लब से विभिन्न शासकीय विभागों के लिए चयनित होते है।

 

  • जानें संस्कारधानी जबलपुर के गौरव श्री नवनीत ने कैसे शासकीय कार्य में होते हुए अपना जीवन प्रतिभाशाली बच्चों के जीवन को निखारने में लगा दिया ;

 

 जैसा मैंने ऊपर ही कहां दुनिया में ऐसा कुछ नहीं है  जो इंसान कर नहीं सकता , जरुरी है लगन , मेहनत और आत्म विश्वास की। परतुं यहाँ सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है 'मार्गदर्शन' की क्योकि कई प्रतिभाशाली बच्चें ऐसे होते है जोकि सही 'मार्गदर्शन' के आभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते और उम्र निकल जाती है।  हां आपमें प्रतिभा है तो आप कभी न कभी तो सफल होंगे जरूर पर इसका इंतज़ार में कही आपकी उम्र न निकल जाये जिससे आप आगे शासकीय  परीक्षाओं में भाग न ले सकें।

ऐसे ही बच्चो के भविष्य को लेकर श्री नवनीत ने वर्ष 2007 में रनर्स क्लब जबलपुर की स्थापना की, शरुआत  में सिर्फ 5 बच्चो को लेकर आगे चले जोकि आज 300+ तक संख्या पहुंच गयी है।

श्री नवनीत द्वारा 'राज्य व् केंद्र शासन के आधीन ऐसी नौकरिया जिसमे शारीरिक दक्षता की जरुरत होती है जैसे मध्यप्रदेश पुलिस हेतु सब इंस्पेक्टर/ सूबेदार /प्लाटून कमांडर/  आरक्षक/वन विभाग  , केंद्रीय विभाग जैसे इंडियन आर्मी / जेल प्रहरी / पैरा मिलिट्री / इंडियन रेलवे आदि  शारीरिक दक्षता परीक्षा से सम्बन्धी भर्ती हेतु निरंतर प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है। 

 

  •  जानें प्रतिभागी परीक्षाओ में प्रतियोगियों को कैसे शारीरिक दक्षता में निपूर्ण करते है श्री नवनीत।

 

अपने प्रशासनिक कार्यो के अलावा प्रतिदिन प्रातः काल बच्चों को एथलैटिक्स में निपूर्ण बनाने के लिए जी जान से लगे रहते है, उन्हें प्रोत्साहित करते रहते है। आप ग्राउंड पर डिसिप्लिन मेन्टेन रखते है  तथा मिसबिहेव/अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करते , ग्राउंड में एक सख्त  प्रशिक्षक के रूप में आप की छवि देखने मिलती है। शारीरिक दक्षता परीक्षाओ में उत्तीर्ण होने  के लिए जरुरी ट्रिक्स और शारीरिक क्षमताओं को विकसित करने के लिए नये नये आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग करते है। इसके ही परिणाम स्वरुप आज दिनांक तक लगभग  760+ बच्चों का राज्य शासन व् केंद्र शासन के आधीन विभिन्न विभागों में चयन हो चूका है जैसे:-

  • मध्य प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक / सूबेदार /प्लाटून कमांडर -125 
  • मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के  पद पर -300
  • मध्य प्रदेश जेल प्रहरी के  पद पर -70
  • मध्य प्रदेश वन विभाग के पद पर -25
  • केंद्रीय पैरा मिलिट्री फाॅर्स में -50
  • रेलवे प्रोटेक्शन फाॅर्स -50
  • रेलवे ग्रुप  डी -100
  • इंडियन आर्मी -40

 तथा अन्य।

आज भी श्री नवनीत जी से प्रशिक्षित छात्र उन्हें बहुत मानते है जैसे की वर्ष 2010 में मध्यप्रदेश पुलिस में महिला आरक्षक पद पर चयनित उम्मीदवार मंजरी विश्वकर्मा व् पूजा विश्वकर्मा ने बताया की नवनीत सर को वे अपने बड़े भाई की तरफ मानती है तथा वे भी उन्हें बहुत सम्मान देते है ये वो पल है जो गुरु और शिष्य के लिए मन में आदर्श बन जाते है। वे आगे कहती है की इनकी ही प्रशिक्षण में प्रथम प्रयास  में ही मध्यप्रदेश पुलिस में सफलता  प्राप्त की। आज वर्तमान में  महिला आरक्षक श्रीमती मंजरी विश्वकर्मा  एवं महिला आरक्षक श्रीमती पूजा विश्वकर्मा जिला जबलपुर में पदस्थ है।

 

  • आर्थिक रूप से कमजोर मगर प्रतिभाशाली व्यक्तियों का सम्पूर्ण खर्च वहन कर उन्हें शासकीय नौकरी के लिए चयनित करवाना।

 

श्री नवनीत प्रतिवर्ष 10 ऐसे प्रतिभाशाली बच्चो का सिलेक्शन करते है जो कि आर्थिक रूप कमजोर से होते है उनका सम्पूर्ण खर्च जैसे कोचिंग क्लास की पूरी फीस, बुक्स ,फिजिकल ट्रेनिंग हेतु  किट , शूज़ आदि रनर क्लब जबलपुर के माध्यम उपलब्ध करायी जाती है। कहते है है जो भाग्य में लेकर आया है वही लेकर जायेगा पर हम भाग्य को बदलने की कोशिश भी न करें ये तो गलत बात है।

आप अपनी मेहनत की लकीरो से भाग्य की लकीरों को बदल सकते हैं , हमारे ऐसे है नवनीत जी। जिन्होंने आज जबलपुर संस्कारधानी ही नहीं अपितु पुरे मध्यप्रदेश को गौरान्वित किया है।

 

जानें कैसे  श्रीमती विमला चक्रवती पत्नी श्री नवनीत ने  एन.एस.जी. कमांडो के रूप में संस्कारधानी जबलपुर (म.प्र.)  को गौरान्वित किया।


Runner's_Club_Jabalpur

 एन.एस.जी. कमांडो का नाम तो सबने सुना होगा नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कमांडो जिन्हे कुख्यात सर्विसेज के लिए जाना जाता है और वे हर तरफ की परिस्थियों में देश की रक्षा करने के लिए सक्षम होती है वही है अपने जबलपुर की तथा श्री नवनीत जी की पत्नी श्रीमती विमला चक्रवती जी। 

आपको भी एथलैटिक्स में कुशलता हासिल है जिसके बदौलत आपने राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिताओ में गोल्ड ,सिल्वर और ब्रॉन्ज मैडल प्राप्त किये है। आप अपने 25 वर्ष के सेवा काल में 6 वर्ष एन.एस.जी. कमांडो के रूप में कार्य  किया जिससे सम्पूर्ण संस्कारधानी गौरान्वित है। इस दौरान आपने श्री अखलेश यादव की सुरक्षा में 6 माह , श्री मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा में 6 माह , श्री मायावती जी की सुरक्षा में 18 माह बतौर एन.एस.जी. कमांडो अपनी अहम सेवायें प्रदान की है। आपकी विशिष्ट सेवाओं की बदौलत आपको डी.जी.एन.एस.जी. पदक से सम्मानित किया गया।

 

इतना ही नहीं श्री नवनीत जी और श्रीमती विमला चक्रवती जी के बच्चे भी एथलैटिक्स में अपने माता - पिता से कही कम नहीं है , आपकी बच्ची एन सुचित्रा अपने स्कूल केंद्रीय विद्यालय की एथलैटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लेने में अव्वल है जिससे इन्हे 2 गोल्ड व् सिल्वर मैडल प्राप्त किया है एस.जी.एफ.आई. में जबलपुर का प्रतिनिधित्व किया है। मध्यप्रदेश ओपन स्टेट प्रतियोगिताओ में  एन सुचित्रा ने 400 मीटर दौड़ व् 800 मीटर की दौड़ में 2 गोल्ड मैडल प्राप्त किये है।

Runners_Club_Jbp

तथा आपके मास्टर एन सिद्धार्थ ने केंद्रीय विद्यालय के रीजनल प्रतियोगिता के 14 वर्ष से कम उम्र के बालक समूह में गोला फेंक की प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय सी.एम.एम. जबलपुर का प्रतिनिधित्व कर गोल्ड मैडल प्राप्त किया है। 

हम सब आपका श्री नवनीत तथा आपकी फॅमिली का धन्यवाद करते है जिससे हमारे जबलपुर को गौरान्वित होने का मौका दिया सही ही आपके मंगलमय जीवन की कामना करते है ही आपका यह सहयोग जबलपुर संस्कारधानी के लिए आगे भी निरंतर जारी रहेगा। "जननी कर्मःभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी"

"अपने सोए अरमानो को हर रोज उसने जगाया है,

आज बुलंदियों को छूकर उसने देश को आगे बढ़ाया है "

Runner's_Club_Jbp_M.P.
ग्रुप पिक्चर-म.प्र. पुलिस कांस्टेबल रनर्स क्लब बैच नंबर 12

Runner's_Club_Jabalpur_M.P._navneet_Sir
ग्राउंड पिक्चर - श्री नवनीत जी रनर्स क्लब जबलपुर 


Friday, May 22, 2020

Great relief for college students, now two degree courses can be done simultaneously, UGC gave permission

UGC_allow_2_courses_simultaneously
 UGC gave permission to do two degree courses simultaneously

The University Grants Commission, while giving a major verdict, has given permission to the students to pursue two degree courses simultaneously. The only condition is that one of them should be regular and the other should be in open, distance or online mode.

UGS Allows Students to Pursue 2 Degree Courses Together: The UGC has given a big decision to allow students to pursue two degrees simultaneously. That is, now you can do BBA from Delhi University, IGNOU or BBA from any other distance education institute together in the same year. For the last several years, students used to complain that they cannot do two courses simultaneously, whereas at times it was necessary for their future plans. But earlier it was considered wrong to take two degree courses in the same year simultaneously, which was not allowed. But now students can do this. However, permission has also been obtained with a condition here, under which one of these two degree courses can be a regular course but the other should be an open, distance learning or online mode course. That is, both degree courses cannot be regular. The UGC has taken this decision considering a proposal.

There can also be separate streams and separate institutions -

The most special thing about this relaxation given by the UGC is that students can also choose to take the course from two different streams. That is, science and humanities can be selected together provided your institute is giving its permission. You can study together from two different institutes or universities. Or if the same institute offers both courses then you can do it from there also.

The committee while talking about this said, since the issue of minimum attendance is associated with regular courses, the committee has the option to do another course with distance learning. UGC Secretary Rajneesh Jain believes that this will increase career prospects for students.

 

UGC launches helpline number for students; enter your complaints on it

UGC has launched a helpline number and email ID to know the problems of the students amid deteriorating arrangements. On this, students can raise their complaints, problems or any other serious issue.

UGC Launches Helpline Number and Id for Students: University Grants Commission (UGC) has launched a helpline number and email ID to help students and to know their problems. They can tell their complaints by calling on it or mailing it to the email address given. Actually, due to Corona virus, there have been many changes in education and education system these days. Somewhere the exams are being postponed, and then somewhere their pattern is being changed. In the midst of all these new changes, students are not able to sit well at times. Along with this, many times they have their own reasons, which are obstructed in following the instructions from the colleges. To solve these and many such problems, the UGC has given the students a chance to say their words. They can register their complaints on this helpline number or can also send them on email ID. For your information, let us know that before this, UGC also launched guidelines and academic calendar for universities. Students can also complain on the UGC pre-existing online students' grievances redressal portal.

Helpline Number and ID -

The helpline number issued by UGC is 011-23236274. Also the address of the email ID to which the complaint can be sent is covid19help.ugc@gmail.com. Official notification of this is given on the official website of UGC, which you can see. The official website address for doing so is www.ugc.ac.in. This Grievance Redressal Cell of UGC will monitor all questions, complaints and other academic matters of students, teachers and institutes arising out of Kovid-19 epidemic. Not only this, along with grievance redressal, the UGC has also set up a task force to address the concerns, grievances of students, teachers and institutions and seek redress accordingly.


Thursday, May 21, 2020

The giant comet is moving fast towards the Earth, can be seen from the surface of the Earth on 27th May

Comet_SWAN_Near_to_earth
Comet_SWAN_Near_to_earth

27 May 2020 Comet: On April 29 last month, the threat of the massive Asteroid hitting the Earth was averted that another such astronomical event is likely to occur. Although this time it is not an asteroid, but a giant comet is moving towards Earth at a fast speed. It is going to enter the Earth's orbit from the Sun. By the end of May it will be very close to the Earth. According to information on NASA's official Twitter handle NASA Sun & Space and NASA Asteroid Watch, it will be extremely close to the Earth's surface on May 27, 2020. It can also be seen directly from the earth.

Comet sighting is a rare occurrence in itself as they appear once in many years. Called Comet SWAN, this comet is carrying miles long dust, stone pieces, gas, ice, particles of space debris, etc. behind it like tail stars. They glow when exposed to sunlight. Although comets are not as deadly or harmful as asteroids, nothing can be said in advance about the effect that occurs after entering the Earth's atmosphere. Generally, small-sized comets enter the Earth's orbit and burn by burning. It gets blown up and we see it in the sky as a scene of a star falling apart. The impact of this comet approaching the Earth on May 27 can be seen on the sky. It is being told that due to this the color of the sky will turn green, which will be a thrilling experience. Know the special features of this comet - The tail of this swan comet is millions of miles long, which is the center of attraction for space lovers and scientists. - It can be seen with straight eyes, without the aid of a telescope, but in the meantime it should not be hit by any other comet or object.

  • -At this time it is 53 million i.e. 4 billion 2 crore 77 lakh 3 thousand 200 miles from the earth. According to the speed at which it is moving towards the Earth, it can hit the Earth by May 27.
  • - In many European countries, including Britain, it can be seen in the evening. In Asian countries, it can be seen as per Eastern Time Zone.
  • - Space scientists say that this comet hits the Earth once in 11 thousand years. However, there is no damage, only the color of the sky changes to green.
  • - It can be seen clearly on 27 May. Good if you have a small thick telescope or telescope.
  • - The closer it is to the Sun, the greater its brightness will be. There is also a possibility that it will break into small pieces.
  • - This comet consists mainly of a part filled with ice and methane gas orbiting the Sun. The reason for coming close to the Earth is the gravity of the Earth.

Glanced at Pune in January 2013, watch video

In April, a citizen scientist spotted a never-before-seen comet in data from @ESA/@NASA’s SOHO satellite! Scientists are hopeful Comet SWAN will remain bright enough to be seen from Earth as it continues towards its close approach of the Sun on May 27: https://go.nasa.gov/2WthwkQ 

Comet_Swan

 

What are comets? 

Comets or comets are stars found in the solar system, which are basically small pieces made of stone, dust, ice and gas. These planets revolve around the Sun in the Solar System. Short-comets complete the orbit of the Sun in an elliptical path once in about 6 to 200 years. The path of some comet stars is annular and appears only once in its lifetime. Comets with long paths often take thousands of years to orbit one. Most comets are made of ice, carbon dioxide, methane, ammonia and other substances such as silicate and organic mixtures. They are also called as the tail in the common language because behind them there is a long tail of the above elements which shines with sunlight.

गरीब,लावारिस व असहायों का मसीहा - मोक्ष संस्थापक श्री आशीष ठाकुर । (Part-01)

गरीब,लावारिस व असहाय लोगों का मसीहा - मोक्ष संस्थापक श्री आशीष ठाकुर । छू ले आसमां जमीन की तलाश ना कर , जी ले जिंदगी ख़ुशी की तलाश ना कर , ...