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Saturday, April 4, 2020

क्या गंगा वास्तव में शुद्ध है ? गंगा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :


Ganga Rever India
क्या गंगा वास्तव में शुद्ध है ? गंगा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

गंगाजल , भारत की प्राचीनतम नदी गंगा का पानी , कहते है की इसमें  से सबका पाप धूल जाता  है और न जाने कितने वर्षो से भारत के लोगो  की इसपर आसिम श्रद्धा है अटूट विश्वास है, 2500  किलोमीटर लम्बी नदी, जिसमे जादू है l
क्या यह  सिर्फ श्रद्धा है  या इसे  साइंस भी साबित करता है की गंगाजल दुनिया का सबसे शुद्ध पानी है ? 
ऐसा मना जाता है की गंगा का पानी किसी और चीज़ में मिलाया जाये तो वह शुद्ध हो जाता है पुरिफ़िएड हो जाता है l

इस बात  में कितनी सच्चाई है यह जाने के लिए सन्न 1986 एक  ब्रिटिश साइंटिस्ट अर्नेस्ट हनबरी हैंकिन  ने गंगा के पानी में वो पानी मिलाया जिसमे कॉलरा के कीटाणु भरे हुए थे अगले 3 घंटों में उन्होंने पाया कि उन सारे कीटाणुओं का खात्मा हो चुका था जबकि नॉर्मल पानी या किसी भी और पानी में ये कीटाणु  पूरे 2 दिन तक जिंदा रहते हैं और अपने आप को बढ़ाते हैं , अगर आपको बताने से पहले में सच कहु तो मैं भी यही सोचता था की मम्मी जो हमारे घर में  गंगाजल  का पानी  रखती है वो और कुछ नहीं अंधश्रद्धा है l
सन्न 1927  मैं  गंगा के पानी में कुछ डेड बॉडीज यानी कि शव पाए गए जो की कॉलरा और  डिसेंट्री (पेचिस) के कीटाणु से इन्फेक्टेड थे l

फ्रांस के साइंटिस्ट फिलिप्स ने  पाया इन डेड बॉडीज के कुछ ही फ़ीट नीचे जहां की करोड़ों कीटाणु होने चाहिए थे वहा  एक भी कीटाणु नहीं था, आखिर गंगा के पानी में ऐसा है क्या जो चीज़ो को शुद्ध कर देता है l
इसकी खोज भी फिलिप्स ने ही लगायी , उन्होंने पता लगाया की गंगा एक वायरस है जिसका नाम है बैक्टीरियोफेज  मतलब एक ऐसा वायरस जो बैक्टीरिया का खात्मा कर देता है बैक्टीरियोफेज की मदद से पानी हमेशा शुद्ध रहता है l  आपको पता होना चाहिए वायरस दो प्रकार के होते है अच्छे वायरस बुरे वायरस मतलब गुड वायरस  बेड वायरस l

आपको पता है गंगा नदी विश्व की दूसरी नदियों के मुकाबले आर्गेनिक वेस्ट को 15 गुना ज्यादा तेज़ी के साथ डी कंपोज करती है , इस नदी में बाकि सभी नदी के  मुकाबले 25% ज्यादा ऑक्सीजन है और अपने अंदर फेका गया कचरा बाकि नदी के मुकाबले 15% जल्दी  क्लीन कर देता है शायद हमारे पूर्वजों को गुड वायरस और बेड  वायरस का कांसेप्ट पहले से पता था मगर इस चीज़ को लोगो को समझने ने बजाय धर्म  में डालना बेहतर समझा क्योकि आखिर धर्म तो सही होता है और लोग इसे जरूर सही मानेंगे तो जब लोगों को पता चला कि गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाएंगे उन्हें यह नहीं पता है  कि यह पाप धुले ना धुले उनको बैक्टीरिया से मुक्त स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए काम आयेगी l

ये तो थे तथ्य पर आप कभी वाराणसी या इलाहाबाद गए हो , अगर नहीं गए हो तो गूगल  फोटो देख लीजिये हमारी गंगा मैया की एक ऐसी वाटरबॉडी जिसे हम पूछते हैं , जो हमारी जिंदगी लम्बी करती है और हम उसे क्या देते है  पूजा के नाम पर वहा कूड़ा कच्चा फेक रहे है और ना जाने कितने सारे छोटे-छोटे नाले , फैक्ट्रियो के ऐश, धुल गंगा के मिलकर  हमारी गंगा को हानि पहुंचा रहे हैं, गंगा का बहाब कम हो रहा  है, गंगा का पानी सुख रहा है, पानी काम हो रहा है , हमारी गंगा ख़त्म हो रही है और  भविष्य में  भारत की जनसंख्या आज के मुकाबले तीन गुना तक बढ़ जाएगी तब आप क्या करोगे  का भी सबसे बड़ा स्रोत है , भारत में  फसलों की सिंचाई करने में और लोगो की प्यास बुझाने में बहुत बड़ा योगदान है l

और क्या आपको पता है 50 करोड़ जिंदगिया गंगा पर अपनी रोज़ी रोटी के लिए निर्भर है , एक तिहाई भारत की  जनसंख्या गंगा से सिंचित फसलों से  अपना पेट  भर रही है , जिस  गति से हम अपनी गंगा को हानि पंहुचा रहे है उससे न  सिर्फ भारत  की एक तिहाई जनसंख्या पर फर्क पड़ेगा बल्कि उसके साथ-साथ एक और नदी जमुना हम ख़राब कर देंगे ,अभी भी समय है हम अपनी गंगा को बचा सकते हैं , कुछ छोटे छोटे उपायों से , आप गंगा में निश्चित ही डुबकी लगाने जा सकते है पर उन केमिकल शैम्पू , साबुनो का क्या जो आप गंगा में साथ ले जाते हो और वो पानी को ख़राब करता है , आप गंगा की पूजा करना चाहते हो उन पर फूल चढ़ाकर मगर उन फूल के पत्तो पर कीटनाशकों का क्या ?  जो न सिर्फ उस पानी को प्रदूषित कर रही है बल्कि उसके अंदर बसी कई सारी जान  के लिए भी जीना मुश्किल कर रही है l  जो प्लास्टिक के बोतले आप गंगा के पानी में डाल रहे हो वो  सदियों तक वही रहेगी l

गंगा किनारे भारत के सबसे बड़े तीर्थ स्थल हैं जैसे ऋषिकेश, हरिद्वार, वाराणसी, इलाहाबाद और कोलकाता, जो दुनिया के हर कोने से लाखों लोगों द्वारा जाते हैं, जो ज्ञान और मुक्ति के लिए अपनी प्यास बुझाते हैं।
पक्षियों की कई किस्में पाई जाती हैं, जैसे कि सीगल, मैना पक्षी, तोते, कौवे, पतंग, दलदल और फव्वारे। सर्दियों में, बतख और जलपक्षी उच्च हिमालय में दक्षिण की ओर पलायन करते हैं, बड़ी संख्या में पानी से ढके क्षेत्रों में बसते हैं।

25000 किलोमीटर की नदी बचाने के  कदम हम से ही शुरू होते हैं और बहुत छोटे हैं , इंडियन  माइथोलॉजी में गंगा को क्षमा की देवी माना गया है मगर हम कब तक उस देवी के धीरज की इसीतरह परीक्षा लेते रहेंगे l

गंगा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :

1.  गंगा नदी हिमालय पर्वत निकलकर भारत और बांग्लादेश के देशों से होकर बहती है।
2.  यह लंबाई के हिसाब से दुनिया की 34 वीं सबसे लंबी नदी है।
3. गंगा नदी का मुख दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा बनाता है, जिसे सुंदरबन के नाम से जाना जाता है, और 1997 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था।
4.  यह निर्वहन द्वारा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नदी है।
5.  यह लंबाई के हिसाब से दुनिया की 34 वीं सबसे लंबी नदी है।
6.  गंगा में बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं: रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडकी, बुरि गंडक, कोशी, महानंदा, तमसा, यमुना, सोन और पुनपुन।
7.  गंगा को 2007 में दुनिया की पांचवी सबसे प्रदूषित नदी के रूप में स्थान दिया गया था।

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